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अंशु जेमसेन्पा: 5 दिन में दो बार एवरेस्ट विजय, पद्मश्री से किया सम्मानित
हिंडोल बसु, नई दिल्ली दुनिया की पहली महिला जिसने पांच दिन के अंतराल पर दो बार पर फतेह हासिल की। गणतंत्र दिवस पर उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। लोगों का सपना होता है दुनिया के सबसे ऊंचे मकाम पर पहुंचना। और दो बच्चों की मां ने ऐसा एक बार नहीं, दो बार नहीं बल्कि पांच बार ऐसा किया। पर्वतारोही जेमसेन्पा अब 41 साल की हैं। अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पांच बार जीत हासिल की है। यह बात काफी हैरान करने वाली है। उन्होने 12 मई को पहली बार एवरेस्ट पर चढ़ी और इसके बाद 21 मई दोबारा इस चोटी पर फतेह हासिल की है। वह एक ही सीजन में दो बार माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बनीं। इसके ठीक बाद उन्होंने 2013 में तीसरी बार एवरेस्ट पर चढ़ाई की। साल 2017 में उन्होंने वह कारनामा किया जिसका सपना कई चोटी के पर्वतारोही (पुरुष और महिला) सपना ही देखते हैं। जेमसेन्पा ने पांच दिन के अंतराल पर ही एवरेस्ट की चोटी पर फतेह हासिल की। पहले 16 मई और फिर 21 मई को उन्होंने ऐसा किया। किसी महिला द्वारा इतने कम वक्त में दो बार ऐवरेस्ट पर चढ़ने का यह एक रेकॉर्ड है। 16 मई को उन्होंने 17 अन्य पर्वतारोहियों के साथ उन्होंने एवरेस्ट पर जीत हासिल की और सुबह नौ बजकर 15 मिनट पर तिरंगा लहराया। इसके बाद 19 मई को नेपाली पर्वतारोही फुरी शेरपा के साथ चढ़ाई शुरू की और लगभग बिना रुके रात 10 बजे तक इसे जारी रखा। अगली सुबह उन्होंने दोबारा शुरुआत की और फिर ब्रेक के बाद 21 मई सुबह 7:45 पर चोटी पर पहुंच गईं। दूसरी चढ़ाई खत्म करने में उन्हें 118 घंटे और 30 मिनट लगे। उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्मश्री से सम्मानित किया। जेमसेन्पा ने 2009 में पर्वतारोहण शुरू किया। उन्होंने कहा, 'मैं काफी रॉक क्लाइमबिंग और ऐडवेंचर स्पोर्टस करती थी। अरुणाचल माउंटेनीरिंग ऐंड ऐडवेंचर स्पोर्ट्स असोसिएशन, जिसकी अध्यक्षता मेरे पति करते रहे, ने इसे पहचाना और मुझे पर्वतारोहण के लिए प्रेरित किया।' उन्होंने आगे कहा, 'एक बार शुरू करने के बाद मैंने मुड़कर नहीं देखा। अडवांस ट्रेनिंग कोर्स के दौरान मैंने महसूस किया कि मुझे पहाड़ो पर रहना पसंद है और इसी बीच माउंट ऐवरेस्ट पर चढ़ने का ख्वाब मेरे जेहन में आया।' तो पहली बार ऐवरेस्ट पर पहुंच कर कैसा लगा?, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, 'पहली बार की फीलिंग काफी अच्छी थी। मैंने स्वयं को ईश्वर के अधिक नजदीक पाया। मेरे रुएं खड़े हो गए थे। वहां से जो नजारा दिख रहा था वैसा आप सिर्फ सपनों में देखते हैं।'
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