मैं जानता था कि मुझे दोगुना अच्छा प्रदर्शन करना होगा: हनुमा विहारी

अरानी बसु, जमैका ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय टीम में जगह बनाने से पहले उन्होंने घरेलू क्रिकेट में हर स्तर पर रन बनाए। वेस्ट इंडीज दौरे पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्होंने 96.33 के बल्लेबाजी औसत से 289 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने दो हाफ सेंचुरी और एक सेंचुरी भी लगाई। उनका प्रदर्शन यह दिखाता है कि वह भारतीय मिडल ऑर्डर को मजबूती देने का काम बखूबी निभा सकते हैं। जमैका से वापसी की फ्लाइट से पहले उन्होंने इस दौरान हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से इस बारे में बात की- आपको डेब्यू किए हुए पूरा एक साल हो गया... मुझे लगता है कि इस दौरान मुझमें कोई बदलाव आया है। मैंने जिन परिस्थितियों में बल्लेबाजी की वे वाकई मुश्किल थीं। ऑस्ट्रेलिया में बल्लेबाजी करना मुश्किल था। यह लंबा दौरा था। मैंने ज्यादा रन तो नहीं बनाए लेकिन प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहा। यह बहुत जरूरी था। मैं झूठ नहीं बोलूंगा लेकिन मैं नर्वस था। आपने घरेलू क्रिकेट में सभी पड़ाव पार किए हैं। अंडर-19 से लेकर जोनल टीम और फिर इंडिया 'ए'... क्रिकेट के लिहाज से छोटे राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए मामला कुच अलग होता है। हैदराबाद और आंध्र ऐसे ही राज्य हैं। आपको अपनी पहचान बनाने के लिए मजबूत राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों के मुकाबले दोगुना बेहतर प्रदर्शन करना पड़ता है। लेकिन समय के साथ-साथ आपको इसकी आदत हो जाती है। हर सीजन और मैच महत्वपूर्ण बन जाता है। इससे आपको मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिलती है। आप 2012 में वर्ल्ड कप जीतने वाली अंडर-19 टीम का हिस्सा थे, लेकिन आपको कोई मैच खेलने का मौका नहीं मिला था। आपका सफर उस टीम के साथी खिलाड़ियों या आजकल आने वाले युवाओं जितनी चमकदार नहीं रही है... मैंने अपना पहला प्रथम श्रेणी मैच 17 साल की उम्र में खेला। मुझे सीनियर लेवल क्रिकेट का अनुभव हो चुका था। अंडर-19 वर्ल्ड कप के बाद मुझे अंदाजा था कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट के जरिए मैं अगले पड़ाव पर जा सकता हूं। रणजी ट्रोफी मेरे लिए बसे जरूरी चीज बन गई थी। मुझे अहसास था कि साल दर साल मुझे हर सीजन में करीब 1000 रन बनाने होंगे। मैंने कभी हार नहीं मानने का फैसला किया। मुझे अपनी फिटनेस पर काफी काम करना पड़ा। आखिर मेरी मेहनत रंग लाई और मुझे टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका मिला। अंडर-19 वर्ल्ड कप से लेकर अब तक कितनी चीजें बदल चुकी हैं? (हंसते हुए) मैं कुछ बदल गया हूं। (कुछ रुकते हुए) मेरा मतलब कि एक इनसान के तौर पर मैंने ज्यादा बदलने की कोशिश नहीं की है लेकिन जहां तक बात क्रिकेटीय हुनर की है तो मैंने इसमें काफी सुधार किया है। मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात है जब कप्तान विराट ने कहा कि जब मैं बल्लेबाजी कर रहा होता हूं तो ड्रेसिंग रूम शांत रहता है। आपने 2016 में राज्य बदला। आपने हैदराबाद से आंध्र जाने का फैसला कैसे किया? मैं हैदराबाद के लिए लगातार रन बना रहा था लेकिन अगले स्तर (अंतरराष्ट्रीय) पर मेरा चयन नहीं हो रहा था। आंध्र के लिए खेलने का फैसला करना मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ फैसला रहा। मुझे उसके बाद पहचान मिलने लगी। जब आपने भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेला तब भरत अरुण टीम के कोच थे। जब आपने टेस्ट टीम के लिए डेब्यू किया तो वह ड्रेसिंग रूम में बतौर गेंदबाजी कोच मौजूद थे। इससे आपके लिए माहौल सहज हुआ होगा... अरुण सर, शानदार इनसान हैं। अंडर-19 के दिनों से ही उन्होंने मेरी काफी मदद की है। वह हमेशा मेरी मदद के लिए तैयार रहते हैं। वह मेरे लिए पिता समान हैं। भारतीय ड्रेसिंग रूम में उन्हें देखकर मैं काफी खुश था। मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद भी आंध्र से हैं... एमएसके सर ही ने मझे कॉल किया था और आंध्र से खेलने का ऑफर दिया था। आज भी जब हम मिलते हैं तो आंध्र में क्रिकेट के बारे में बात करते हैं। हम हमेशा आंध्र में अच्छी टीम बनाने की योजना पर बात करते हैं। जब आप सिर्फ 12 साल के थे तब आपके पिता का देहांत हो गया था। इससे उबरना आपके लिए काफी मुश्किल रहा होगा... यह एक मुश्किल वक्त था। मेरे पिता के देहांत के बाद हम हैदराबाद शिफ्ट हो गए थे। आर्थिक रूप से भी यह एक मुश्किल वक्त था। हम एक बड़े शहर में आ गए थे। मेरी अकादमी (सेंट जोंस) ने भी मुझे पूरा सपॉर्ट किया। उन्होंने मेरी कोचिंग के लिए पैसे नहीं लिए लेकिन शुरू के चार-पांच साल काफी चुनौतीपूर्ण थे। अपनी पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना काफी कठिन था। मुझे क्रिकेटर बनाने में मेरी मां का बहुत बड़ा योगदान है। आपने पढ़ाई कब छोड़ दी... 16 साल की उम्र में मैं फर्स्ट क्लास क्रिकेट सेट-अप का हिस्सा बन गया था। इसके बाद मैं अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाया। मैं पढ़ाई छोड़कर क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। मेरी मां इसके लिए राजी हो गई। यह एक बहुत बड़ा फैसला था। मौजूदा फील्डिंग कोच आर. श्रीधर हैदराबाद में आपके कोच थे। तो भारतीय ड्रेसिंग रूम में आपके लिए कुछ परिचित चेहरे थे... मैं हमेशा से उनका स्टूडेंट रहा हूं। मुश्किल वक्त में मैं उनके पास जाता हूं। मुझे खुशी है जब मैंने पहला टेस्ट शतक लगाया तब वह मौजूद थे। वह अपने स्टूडेंट को यहां प्रदर्शन करते देख काफी खुश थे। उन्होंने ही मुझे बताया था कि 'वी' में खेलना मेरी स्ट्रेंथ है। यह बात मुझे जंच गई।


from Sports News in Hindi: Latest Hindi News on Cricket, Football, Tennis, Hockey & more | Navbharat Times https://ift.tt/2PNKXN6

No comments

Powered by Blogger.