Sunday, November 7, 2021

ऐसे टूटा T-20 विश्व कप जीतने का सपना, वो गलतियां जिसका जवाब लिए बिना लौटेगी टीम इंडिया

नई दिल्ली 2007 की चैंपियन भारतीय टीम का टी-20 वर्ल्ड कप जीतने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। अफगानिस्तान पर जीत के साथ न्यूजीलैंड ने सेमीफाइनल के लिए क्वॉलिफाइ किया और विराट कोहली की कप्तानी वाली टीम को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, भारत को टूर्नामेंट में अपना आखिरी मैच नामीबिया के खिलाफ सोमवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेलना है, लेकिन यह सिर्फ औपचारिकता ही होगी। इस मैच का टूर्नामेंट पर कुछ असर नहीं पड़ेगा। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले अगर कोई यह कहता कि भारत सेमीफाइनल में नहीं पहुंचेगा तो शायद हर किसी को बुरा लगता, लेकिन ऐसा हुआ है। जिस टीम को खिताब का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था वह बड़ी बेआबरू होकर अपनी ही मेजबानी वाले टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है। आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर क्या कुछ भारत के खिलाफ गया और वह कैसे सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया। शुरुआती दो मैचों में पूरी तरह फेलभारतीय टीम ने प्रैक्टिस मैच में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को एकतरफा मात दी थी, लेकिन जब वह टूर्नामेंट में खेलने उतरी तो अचानक गुम से हो गए। टीम में बड़े-बड़े नाम होने के बावजूद पाकिस्तान के खिलाफ विराट कोहली को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज कुछ खास नहीं कर सका। इसके बाद बोलिंग की बात आई तो दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक माने जाने वाले जसप्रीत बुमराह की अगुआई में टीम इंडिया कोई विकेट भी नहीं चटका सकी। न्यूजीलैंड के खिलाफ भी कुछ ऐसा ही हुआ। यहां बुमराह ने दो विकेट जरूर चटकाए, लेकिन सभी विभागों में कीवी टीम भारी पड़ी। नतीजा पहले मैच में 10 विकेट तो दूसरे में 8 विकेट की बड़ी हार मिली। यहां ही टीम का बाहर होना लगभग तय हो गया था। हार्दिक पंड्या को लेकर गफलतटूर्नामेंट से ठीक पहले इस शर्त पर हार्दिक पंड्या का टीम में सिलेक्शन हुआ कि वह गेंदबाजी भी करेंगे, लेकिन शुरुआती दोनों मैचों में ऐसा हुआ नहीं। यह न केवल सोशल मीडिया पर फैंस के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय रहा, बल्कि कॉमेंटेटर्स और क्रिकेट विशेषज्ञ भी सवाल उठाते नजर आए। पाकिस्तान के खिलाफ अगर विराट कोहली को एक अतिरिक्त गेंदबाज मिलता तो हो सकता है कि कुछ असर पड़ता, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। बाद के मैचों में उन्होंने बोलिंग की, लेकिन बहुत असर नहीं हुआ। प्लेइंग इलेवन और पोजिशन पर सवालहार्दिक पंड्या और भुवनेश्वर के प्लेइंग इलेवन में रखने पर सवाल उठा तो न्यूजीलैंड के खिलाफ रोहित शर्मा का ओपनिंग नहीं करना सभी को कचोटता नजर आया। अगर आइडिया कामयाब होता है तो सवाल कम खड़े होते हैं, लेकिन ईशान किशन कुछ खास नहीं कर सके और बदलाव के रूप में टीम में शामिल किए गए शार्दुल ठाकुर भी परफॉर्म करने में असफल रहे। धोनी की मेंटॉरशिप भी नाकामइसमें कोई शक नहीं कि मैदान खिलाड़ियों को ही परफॉर्म करना होता है। कोचिंग स्टाफ पर्दे के पीछे से सपोर्ट करता है, लेकिन जब भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी टी-20 वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया का मेंटॉर बने तो टीम से और भी बेहतर करने की उम्मीद थी। उन्होंने अपनी कप्तानी में कुछ दिनों पहले चेन्नई सुपर किंग्स को IPL का चौथा खिताब भी दिलाया था। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। रणनीति के किंग कहे जाने वाले धोनी भी शुरुआती दो मैचों में टीम इंडिया की मदद करने में कामयाब नहीं रहे। जब वह टीम इंडिया से जुड़े तो कप्तान विराट कोहली सहित सभी का मानना था कि उनके अनुभव और रणनीति बनाने की छमता भारतीय टीम के काम आएगी। नाम बड़े और दर्शन छोटेइसमें कोई शक नहीं कि टीम इंडिया में एक से बड़े एक नाम हैं। केएल राहुल ने IPL 2021 में जबरदस्त प्रदर्शन किया था। विराट कोहली और रोहित शर्मा के आंकड़े और रेकॉर्ड कई इंटरनेशनल टीमों से भी बेहतर हैं। जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और रविंद्र जडेजा अपनी बदौलत टीम को जीत दिलाने का दम रखते हैं, लेकिन ओवरऑल पूरी टीम पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ इन बड़े नामों के दर्शन बड़े ही छोटे रहे। T20 कप्तान के तौर पर अपना आखिरी टूर्नामेंट खेल रहे विराट कोहली और कोच रवि शास्त्री के लिए यह टूर्नामेंट हमेशा दुस्वप्न की तरह रहेगा। जब जागे तो हो चुकी थी देरदो मैचों में शर्मनाक हार के बाद भारतीय टीम जागी, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। उसने अफगानिस्तान को 66 रनों से हराया। इसके बाद स्कॉटलैंड को महज 6.3 ओवरों में 8 विकेट से मात दी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। दरअसल, भारत को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए जरूरी था कि अफगानिस्तान न्यूजीलैंड को हराता। ऐसे में अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के 6-6 अंक होते। भारत अपने आखिरी लीग मैच में नामीबिया के खिलाफ जीत दर्ज करते हुए नेट रन रेट के हिसाब से सेमीफाइनल के लिए क्वॉलिफाइ करता, लेकिन न्यूजीलैंड ने मैच जीतते हुए 8 अंकों के साथ सीधे सेमीफाइनल में पहुंचने में कामयाबी हासिल की। देखा जाए तो इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के सामने कुछ ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब शायद किसी के पास नहीं है।


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