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मिल्खा ने बताया, ओलिंपिक मेडल क्यों मुश्किल
नई दिल्लीमहान भारतीय ऐथलीट () का मानना है कि ओलिंपिक में मेडल जीतना क्रिकेट खेलने से कहीं अधिक मुश्किल है। उन्होंने कहा कि यहां फाइनल में पहुंचना भी आसान नहीं होता। इसके साथ ही फ्लाइंग सिख ने में कोई भी ऐथलेटिक मेडल नहीं मिलने की बात भी कही। बता दें कि तोक्यो ओलिंपिक इसी वर्ष होना था, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से इसे अगले वर्ष तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। पाकिस्तान में जाकर धमाल मचाने वाले इस महान ऐथलीट ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में कहा, 'ओलिंपिक में ऐथलेटिक सबसे मुश्किल खेल है। यही नहीं, रेसलिंग या शूटिंग भी आसान नहीं है। यह क्रिकेट की तरह नहीं है, जहां 5-7 देश खेलते हैं। जहां भारत आज हार गया तो कल जीत गया। ओलिंपिक में 200 से 220 देश खेलते हैं। ऐथलेटिक्स में मेरे अलावा पीटी ऊषा, श्रीराम, गुरुबचन सिंह रंधावा, अंजू बॉबी जॉर्ज फाइनल में तो पहुंचे, लेकिन मेडल नहीं जीते। यहां तक पहुंचना भी आसान नहीं था।' तोक्यो ओलिंपिक में संभावनों पर बात करते हुए उन्होंने कहा- मुझे नहीं लगता है कि तोक्यो में ऐथलेटिक में कोई मेडल मिलेगा। यहां अमेरिका, केन्या, जमैका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश के ऐथलीट फिनिश लाइन से पहले बाजी मार लेते हैं। हिमा दास और दुती चंद अच्छा कर रही हैं, लेकिन उन्हें बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत है। कैसे जीत से हैं ओलिंपिक मेडल? इसके बारे में उन्होंने कहा, 'इसके लिए हर स्टेट में ऐथलेटिक्स अकादम खोलनी चाहिए। अच्छे कोचों की नियुक्ती और ऐथलीटों को अच्छी ट्रेनिंग देने के बाद ही ओलिंपिक-2024 तक मेडल संभव है।'
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