नितिन नाइक, मुंबई वेस्ट इंडीज दौरे के साथ ही संजय बागड़ का टीम इंडिया के साथ बतौर बल्लेबाजी कोच सफर समाप्त हो गया। ने 2014 में टीम के साथ करना शुरू किया था लेकिन वर्ल्ड कप में टीम के सेमीफाइनल में बाहर होने से ही उन पर दबाव बढ़ गया था। इंग्लिश परिस्थितियों में नंबर चार न तलाश पाने का खमियाजा बांगड़ को भुगतना पड़ा। यूं तो टीम इंडिया के कोचिंग स्टाफ का कार्यकाल वर्ल्ड कप के साथ ही समाप्त हो रहा था लेकिन इसे पहले ही विंडीज दौरे तक बढ़ा दिया गया था। इसके बाद टीम के नए सिरे से कोचिंग स्टाफ का चयन हुआ तो बांगड़ के अलावा बाकी सब को दोबारा चुन लिया गया। रवि शास्त्री एक बार फिर मुख्य कोच बने और भरत अरुण को गेंदबाजी कोच की जिम्मेदारी सौंपी गई। टीम की फील्डिंग सुधारने की जिम्मेदारी भी आर. श्रीधर के पास ही रही। हालांकि बैटिंग कोच की जिम्मेदारी पूर्व टेस्ट क्रिकेटर विक्रम राठौड़ को सौंपी गई। निराशा स्वाभाविक है बांगड़ का कहना है कि हालांकि कोचिंग स्टाफ से हटाए जाने के बाद वह निराश थे। उन्होंने कहा, 'निराश होना स्वाभाविक था। कुछ दिनों तक मैं ऐसा रहा। लेकिन मैं बीसीसीआई और अन्य कोचों डंकन फ्लेचर, अनिल कुंबले और रवि शास्त्री का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे पांच साल तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने का मौका दिया। यह ब्रेक मुझे तरोताजा और खुद को दोबारा तलाशने का मौका देगा।' कैसा रहा बांगड़ का कार्यकाल बांगड़ जब टीम इंडिया के बैटिंग कोच रहे अगर उस दौरान टीम के प्रदर्शन पर एक नजर डाली जाए तो यह अच्छा कहा जा सकता है। टीम ने इस दौरान 52 टेस्ट मैच खेले और कुल 30 में जीत हासिल की। टीम को 11 में हार का सामना करना पड़ा। इन 30 में से टीम ने 13 मैच विदेशी धरती पर जीते। भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने इन 52 टेस्ट मैचों में 70 शतक लगाए। वनडे क्रिकेट की बात करें तो बांगड़ के कार्यकाल में भारतीय टीम ने 122 में से 82 मैचों में जीत हासिल की। 35 मुकाबलों में उसे हार मिली। वहीं भारतीय बल्लेबाजों ने कुल 74 शतक जड़े। वहीं 66 टी20 इंटरनैशनल मैचों से टीम ने 43 मैच जीते और 21 हारे। शतक लगे कुल 6। किसने लगाए कितने शतक, किस पर किया क्या काम उनके कार्यकाल में कप्तान विराट कोहली ने 43 शतक लगाए, रोहित ने 28 और शिखर धवन ने 18 सेंचुरी जड़ीं। चेतेश्वर पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक लगाए। उनसे जब पूछा किया टीम को उन्होंने क्या इनपुट्स दिए थे तो बांगड़ ने कहा, 'विराट हमेशा अपनी कमियों को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत किया करते। हमने उनके संतुलन, क्रीज पर पोजिशन, सीमिंग कंडीशंस में उनकी अप्रोच पर काम किया। शिखर शुरुआत में ऑफ-साइड के खिलाड़ी समझे जाते थे। वह गेंद की लाइन की साइड में रहते। हमने उनके साथ काम किया ताकि वह गेंद की लाइन के पीछे आकर खेल सकें। इससे उनके लिए रन बनाने के नए क्षेत्र खुल गए। इसके साथ ही शॉर्ट बॉल पर आउट होने की उनकी कमी को दूर करने का भी मौका मिला।' बांगड़ ने आगे कहा, 'रोहित की बात करें, तो हमने एंगल के साथ फेंकी जाने वाली गेंदों पर उनकी हेड पोजिशन पर काम किया। पुजारा के मामले में उनके स्टांस की चौड़ाई कम की और उन्हें थोड़ा और सीधा होकर खड़े होने की सलाह दी। इसके बाद ये उन खिलाड़ियों की मेहनत है कि उन्होंने पिछली बातें भूलकर नया सीखा।'
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