Friday, August 2, 2019

'हितों के टकराव' पर CoA की नीति से बढ़ रही नाराजगी

के. श्रीनिवास राव, मुंबई की कमिटी ऑफ ऐडमिनिस्ट्रेटर्स (CoA) हितों के टकराव पर अपनी पॉलिसी को लेकर घिरती दिख रही है। पूर्व क्रिकेटर इस मुद्दे पर और उनकी टीम से नाराज दिख रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि ने इसपर अपनी सहूयिलयत के हिसाब से नीति बना रखी है। ऐसे देश में जहां हर साल लगभग 2000 घरेलू मैच होते हैं, एक योग्य कोच नहीं मिलता, इसकी वजह क्या है? इसकी प्रमुख वजह है कि जिन लोगों में योग्यता है वो या तो राष्ट्रीय टीम से जुड़ना चाहते हैं या फिर अच्छी सैलरी देने वाली आईपीएल फ्रेंचाइजी से। 2 महीने पहले बीसीसीआई ने नैशनल अकैडमी (NCA) के कोच के पद के लिए विज्ञापन निकाले थे, लेकिन अब तक उसे एक अच्छा बोलिंग कोच नहीं मिला है। बैटिंग की अगर बात करें तो प्रवीण आमरे, रॉबिन सिंह और लालचंद राजपूत जैसे पेशेवर भी मौके की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अभी भी उनके हाथ खाली है। ऐसे लोगों की बड़ी तादाद है जो बीसीसीआई से जुड़ना तो चाहते है, लेकिन कड़े और उलझे नियमों की वजह से कोई आग नहीं आ रहा है। एक पूर्व क्रिकेटर इस मामले पर कहते हैं, 'अभी प्रशासक केवल खास तरह के लोगों के साथ काम करना चाहते हैं और उन्हें ही आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका नजरिया विस्तृत और व्यवहारिक नहीं है। रमेश पवार को महिला टीम के कोच के पद पर जारी नहीं रखा गया, क्या वह अचानक से इतने बुरे हो गए कि उनके लिए NCA में भी जगह नहीं है?' सूत्र बताते हैं, '2 बार विक्रम राठौर को बैटिंग कंसल्टेंट और जूनियर कोच नियुक्त करने की कोशिश की गई, लेकिन हितों के टकराव की खबरों के बाद उन्हें नियुक्त नहीं किया गया। क्या CoA ने इस समस्या का समाधान किया? उनकी केवल एक ही चिंता है, नई क्रिकेट अडवाइजरी कमिटी के द्वारा पुरुषों के कोच का चुनाव।' बीसीसीआई के पूर्व ऑपरेशंस हेड एमवी श्रीधर को हैदराबाद में क्रिकेट क्लबों के मालिकाना हक की वजह से 2017 में पद छोड़ना पड़ा था, क्योंकि इसे हितों का टकराव माना जा रहा था। बाद में उनकी मौत हार्ट अटैक की वजह से हो गई थी सूत्र कहते हैं, 'श्रीधर को जाना ही था, लेकिन उन्होंने इसे सही तरीके से नहीं लिया। बीसीसीआई की ऑपरेशंस टीम में मयंक पारिख नाम के एक सीनियर कर्मचारी हैं, वह मुंबई क्रिकेट असोसिएशन (एमसीए) के 4 क्लबों से जुड़े हुए हैं। उनका नाम एमसीए की वेबसाइट पर भी है, इस हितों क टकराव क्यों नहीं माना गया?' विनोद राय और CoA के अन्य सदस्यों पर सवाल उठाने वाले वे कहते हैं, 'पारिख जिन चार क्लबों से जुड़े है उनके नाम है बॉम्बे यूनियन, एरांट क्रिकेटर, विक्ट्री क्रिकेट क्लब और यंग बॉयज क्रिकेट क्लब। क्या विनोद राय और उनकी टीम ने इसकी जांच की? श्रीधर केस में तो उन्होंने पूरा होमवर्क किया था । CoA के सदस्य पारिख के हितों के टकराव के मुद्दे पर काफी वक्त से काम कर रहे हैं, लेकिन वह अभी भी वह बीसीसीआई के साथ काम कर रहे हैं। इन चीजों से साफ पता चलता है कि उन्होंने (C0A) अपनी सहूलियत के हिसाब से पॉलिसी बना ली है।'


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