बेंगलुरु में ट्रेनिंग का फैसला साइना का था: पादुकोण

नई दिल्ली बैडमिंटन अकैडमी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि बेंगलुरु में विमल कुमार के मार्गदर्शन में अभ्यास करने का फैसला का ही था और इसमें अकैडमी की कोई भूमिका नहीं रही। रियो ओलिंपिक से पहले हैदराबाद में गोपीचंद अकैडमी छोड़कर साइना ने बेंगलुरु में ट्रेनिंग का फैसला किया था। गोपीचंद ने आगामी किताब ‘ड्रीम्स ऑफ ए बिलियन : इंडिया ऐंड द ओलिंपिक गेम्स’ के एक अध्याय ‘बिटर राइवलरी’ में लिखा है कि 2014 वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद विमल कुमार के मार्गदर्शन में बेंगलुरु स्थित पादुकोण अकैडमी में अभ्यास के साइना के फैसले से वह काफी दुखी हुए। गोपीचंद ने यह भी कहा कि उन्हें बुरा लगा कि पादुकोण, विमल और ओलिंपिक गोल्ड क्वेस्ट के अधिकारी वीरेन रसकिन्हा ने साइना को हैदराबाद छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पढ़ें, पादुकोण अकैडमी ने एक बयान में कहा, ‘बेंगलुरु में पीपीबीए (प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकैडमी पर अभ्यास करने के साइना के फैसले में पीपीबीए का कोई हाथ नहीं है। विमल कुमार ने साइना को खराब फॉर्म से निकलकर दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने में मदद की। इसके अलावा उन्होंने ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल जीते।’ किताब में 46 वर्षीय गोपीचंद ने यह भी लिखा है कि उन्हें हैरानी है कि पादुकोण ने कभी उनके बारे में कुछ सकारात्मक नहीं कहा। इस पर पीपीबीए ने लिखा, ‘पीपीबीए एक खिलाड़ी और कोच के रूप में भारतीय बैडमिंटन में के योगदान का सम्मान करता है। हमने विश्व स्तर पर उनके खिलाड़ियों की सफलता की सराहना की है और हमेशा उनके साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं।’ गोपीचंद ने खुद पादुकोण के मार्गदर्शन में अभ्यास किया और 2001 में ऑल इंग्लैंड जीतने के बाद कोच गांगुली प्रसाद के साथ जुड़े। पादुकोण अकैडमी ने कहा, ‘पीपीबीए पिछले 25 साल से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहा है। हमारे कई खिलाड़ी अपने कैरियर के अलग अलग चरण पर अकादमी छोड़कर गए हैं। हम कभी उनकी प्रगति में बाधा नहीं बने और यही अकादमी की नीति रहेगी।’


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