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पलूशन: जॉगिंग भी बंद, तो क्या फिर भी होगा मैच?
पार्थ भादुड़ी, नई दिल्लीशुक्रवार को यह दोपहर का समय था और फिरोजशाह कोटला मैदान पर सूरज को अपनी चमक बिखेरने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था। राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित इस मैदान पर धूल और जहरीले धुएं से आसमान पटा पड़ा था। इस बीच भारत और बांग्लादेश की टीमों के खिलाड़ी यहां होने वाले अपने टी20 इंटरनैशनल मैच के लिए अभ्यास करते हुए दिखाई दिए। बांग्लादेश के कुछ खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने पलूशन मास्क पहना हुआ था। यहां मैदान के आसपास मीडिया और मैच का ब्रॉडकास्ट करने वाले चैनल के कर्मी अपने-अपने कामों में बिजी थे। इस जहरीले वातावरण में करीब-करीब सभी का यह अनुभव था कि उनकी आंखों में खुजली, जलन और उससे पानी बह रहा है। इस बीच धूल के कराण बार-बार कफ और थूक की शिकायत भी दिख रही थी। लेकिन यह साफ है कि रविवार को भारत और बांग्लादेश की टीमें इसी खतरनाक माहौल में सीरीज का पहला टी20 क्रिकेट मैच यहां खेलेंगी तो सभी ने इन सब बातों को नजरअंदाज करना ही उचित समझा। शुक्रवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता का स्तर और भी नीचे जा गिरा और यह 'गंभीर प्लस' कैटिगरी पर पहुंच गया, जिसे 'आपातकाल' स्तर माना गया है। इसे देखते हुए राजधानी के सभी स्कूल बंद कर दिए गए। सार्वजनिक तौर पर सेहत का आपातकाल घोषित कर दिया गया। अब अधिकारिक रूप से भी यह मान लिया गया है कि शहर की हवा बुरी तरह टॉक्सिक हो चुकी है और जनरल अडवाइजरी जारी की गई है कि 'गैर जरूरी और अधिक समय तक बाहर रहने' को टाल दें और 'अनावश्यक यात्राओं' को भी कम से कम करें। ऐसे में इंटरनैशनल क्रिकेट मैच को तो भूल ही जाइए। बहरहाल, भारतीय टीम के क्रिकेटरों ने अपना पूरा ट्रेनिंग सत्र और नेट्स का अभ्यास किया। इस दौरान खिलाड़ियों ने किसी तरह के मास्क का भी इस्तेमाल नहीं किया। इस कड़ी में बांग्लादेश के कोच रसेल डोमिंगो ने मीडिया को बताया कि मौसम तो शानदार है। यह जरूर है कि हम लोग अपनी आंखों में कुछ तकलीफ, गले में खराश ट्रेनिंग के दौरान और अब भी महसूस कर रहे हैं लेकिन... इस मौसम से कोई बीमार और सुस्त नजर नहीं आया। अगले कुछ ही पलों में टीम इंडिया के बैटिंग कोच विक्रम राठौड़ ने भी यही कहा कि हमने इस मौसम के लिए कोई विशेष सावधानी नहीं बरती और हम इस परिस्थितियों के आदी हैं। बाकी आप शायद गलत व्यक्ति से सवाल कर रहे हैं क्यों कि यहां मैच खेलना निर्धारित हो चुका है और इसीलिए हम यहां पर मौजूद हैं। टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने भी एक दिन पहले यहां के माहौल पर यही कहा, 'दो साल पहले जब हम श्रीलंका के खिलाफ यहां ऐसे ही माहौल में टेस्ट मैच खेले थे, तब भी हमारे ऊपर इसका (प्रदूषण) का कोई अस नहीं हुआ था।' दो साल पहले उस मैच के दौरान भले ही किसी खिलाड़ी पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा था। लेकिन दिसंबर 2017 में मिली उस सीख को पूरी तरह भुला दिया गया है। कोई मर नहीं रहा था या ऐसी किसी परेशानी में नहीं दिखा था लेकिन भारत और श्रीलंका दोनों ही टीमों के खिलाड़ियों की तबीयत बिगड़ी जरूर थी। तब विदेशी टीम श्रीलंका के ज्यादातर खिलाड़ी मास्क पहनकर मैदान पर उतरे थे। उस टेस्ट मैच के दूसरे दिन श्रीलंका के तेज गेंदबाज उल्टियां करते हुए दिखाई दिए थे और सांस लेने में वे जूझ रहे थे। इसमें कोई दोराय नहीं की श्रीलंका में एक्यूआई (एयर क्वॉलिटी इंडेक्स) का स्तर बेहद स्वास्थ्यजनक है। भारत में सभी लोग लंकाई खिलाड़ियों के इस व्यवहार पर हैरानी जता रहे थे। लंकाई खिलाड़ियों ने खेल कुछ देर के लिए रोक दिया था। 17 मिनट तक रुके इस खेल के दौरान टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने अपनी टीम के साथ मैदान पर मार्च करने का फैसला ले लिया। तब टीम इंडिया के बोलिंग कोच भारत अरुण ने कहा था कि खेल को 'अनावश्यक रूप से रोका गया है।' कोटला के मैदान पर आए दर्शक श्रीलंकाई टीम को 'लूजर-लूजर' कहकर चिल्ला रहे थे। लेकिन जब मैच के अगले दिन अपनी बोलिंग के दौरान भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने उल्टी की तो तभी शांत हुए और लोगों को वातावरण खराब होने की बात समझ में आई। इसके बाद शिखर धवन ने भी यह माना कि शायद श्रीलंकाई खिलाड़ी यहां कोई बहाना नहीं बना रहे थे। दो साल बाद एक बार फिर भारतीय क्रिकेट इस मामले पर गंभीर नहीं हो रही है। बांग्लादेशी कोच डोमिंगो ने बताया, 'हम जानते हैं कि श्रीलंका को यहां पिछली बार परेशानी हुई थी। बिल्कुल आप यहां 6 से 7 घंटे नहीं रहना चाहेंगे। यहां तीन घंटे का सत्र भी वैसा ही चुनौतीपूर्ण होगा।' अहम सवाल यह है कि ऐसे माहौल में मैच क्यों? जब दिल्ली की आबादी को विशेषज्ञों और डॉक्टरों द्वारा यह सलाह दी जा रही है कि खुल में वे जॉगिंग भी न करें, और इमर्जेंसी जैसे हालात में सभी उपाय अपनाए जा रहे हैं, तो दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड को ऐसे हालात में टी20 मैच का आयोजन करने की क्या जरूरत है। दिसंबर 2017 से सीख लेने की जरूरत थी लेकिन अभी और कितना समय लगेगा जब इन परिस्तिथियों को ध्यान में रखकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
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